//जय हो भारत मइया//
सोने की चिडिया ये अपना, देश बना भिखारी,
नेता,अफसर मौज उडावै, जनता मरी बेचारी,
करते सबके सब मक्कारी, जय हो भारत मइया//
जाति,धर्म और छेत्रवाद मे, जनता बटी हमारी,
कुरसी के खातिर ये करते, महाभारत की तैयारी,
जनता बन गयी है गान्धारी, जय हो भारत मइया//
डाकू,मफिया,हत्यारे सब,बन गये खद्दरधारी,
धन,गन औ तिकडम से करते,संसद जाने की तैयारी,
जनता भोली बहुत हमारी,जय हो भारत मइया//
आतंकिन के चक्कर मे भयी, धरती लाल हमारी,
वोट बैक के खातिर नेता, सदा करे गद्दारी,
खुद तो घूमै लै गनधारी, जय हो भारत मइया//
चुनाव के मौसम मे फिर, गीदड बन गये पुजारी,
वोट समझ कर देना, फिर जीतै ना भ्रष्टाचारी,
महिमा लोकतन्त्र की न्यारी, जय हो भारत मइया//
* बृजेन्द्र श्रीवास्तव 'उत्कर्ष'*
(उपरोक्त कविता www.janjagran.co.in में मई,2009 में प्रकाशित)
Monday, 18 May 2009
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