Wednesday, 20 May 2009

कविता ** प्रेम निमन्त्रण **

** प्रेम निमन्त्रण **

भौरों की गुन्जन सुन, कलिया भी फूल बने/
धरती की प्यास समझ, काले घने मेघ बने /
इस दिल की प्यास, इसी दिल में अभी बाकी है/
दिल के जज्बात समझ लो, तो कोई बात बने/
मुझको आंखों में बसा लो, तो कोई बात बने//

रहो न दूर दूर, मुझसे तुम/
कहो जरूर, कुछ तो मुझसे तुम/
दिलो की रागिनी, इस दिल में अभी बाकी है/
प्यार का राग सुनाओ, तो कोई बात बने/
मुझको धडकन में बसाओ, तो कोई बात बने//

मेरे हमदम मेरे जान, जिन्दगानी हो तुम/
मेरी सांसे मेरे प्यार, प्रियकांछिनी तुम/
मेरी हर सांस, सनम तेरे लिये बाकी है/
सांसों का साथ निभाओ, तो कोई बात बने/
मुझको जिन्दगानी बनाओ, तो कोई बात बने//

तेरी चाहत में सनम, हम तो दीवाने बने /
तेरी चाहत में ही तो, दुनिया से बेगाने बने/
मेरी दीवानगी, एक तेरे लिये बाकी है/
मेरी दीवानगी समझो, तो कोई बात बने/
मेरी दीवानी बनो तो, कोई बात बने//

मेरी चाहत का सनम, इतना इम्तहान न लो/
चाहते तुम भी हो, ये सच अब मान भी लो/
मेरे इजहार का, इकरार अभी बाकी है/
खुलके इकरार करो तो, कोई बात बने/
मुझसे तुम प्यार करो तो, कोई बात बने//

फिजा रंगीन है, मौसम भी सुहाना है अभी/
दिल की हर बात, सुन लो और कह दो भी/
दिलों के बीच की, प्रीति अभी बाकी है/
दिलों का मेल कराओ, तो कोई बात बने/
मुझको मनमीत बनाओ तो कोई बात बने//

1 comments:

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति.....