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| प्रेम दिल किसी का न टूटे दुआ कीजीये, बनके राधा के मोहन रहा कीजीये / प्रेम की बासुरी गर बजाये कोई, प्रेमधुन में उसी के रमा कीजीये // प्रेम अनमोल है इसकी कीमत नहीं, धर्म और धन में इसको तो मत तोलिये / जिन्दगी चार दिन की जियो प्रेम से, नफरतो का जहर तो है मत घोलिये // प्रेम तो है इबादत उस ईश की, प्रेम रस में हमेशा गमन कीजीये / तुमको मिल जाये कोई दिवाना कभी, उसकी दीवानगी को नमन कीजीये // इस धरा पर है चहु ओर संकट बहुत, प्रेम के हर सुमन से चमन कीजीये / मिलन हो जाये सबका जरुरी नही, दूर ही दूर से प्रेम है कीजीये// (उपरोक्त कविता "हिंदी गौरव", आस्ट्रेलिया से प्रकाशित)
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2 comments:
उर्त्कष जी आप प्रेम कविता उत्तम है कुछ सामाजिक लेख भी प्रकाशित करेँ
बहुत ही खुबसूरत ख्यालो से रची रचना......
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